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रामचरित मानस में जीवन जीने की सीख : राष्ट्रीय संत श्री चिन्मयानंद बापू

राष्ट्रीय संत श्री चिन्मयानंद बापू आने वाली 2-8 मार्च 2024 तक उरई में 'श्री राम कथा' करेंगे। यह उनकी 563 वी कथा होगी।  इसके लिए तीर्थ क्षेत्र प्रदर्शनी ग्राउण्ड टाउन हॉल के सामने, स्टेशन रोड, उरई क्षेत्र में भव्य पांडाल का निर्माण करवाया गया है. पहले दिन 2 मार्च को कथा दोपहर 1 बजे से होगी। शनिवार को सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, उरई ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रजकिशोर गुप्ता की मौजूदगी में कथावाचक राष्ट्रीय संत श्री चिन्मयानंद बापू ने दीप प्रज्जवलन कर कथा का शुभारंभ किया। शनिवार को बापू ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों को सुनाया। कहा आज के युग में रामचरितमानस अति आवश्यक है।

हमारे जीवन के प्रत्येक किरदार किस तरह से हमें निभाना है, यह शिक्षा मिलती है। उन्होंने गुरु की वंदना प्रसंग को सुनाया। कहा कि मानस में गुरु की चौपाई के माध्यम से सबसे पहले वंदना की गई। गुरु साक्षात हमारे जीवन में परमात्मा का स्वरूप है।

हमें दीप प्रज्जवलन कर श्रीरामकथा का शुभारंभ अपने जीवन में किसी व्यक्ति को गुरु नहीं मानना चाहिए और यदि कोई व्यक्ति हमारा गुरु हो गया है तो फिर उसे साधारण मनुष्य समझना अपराध है। क्योंकि गुरु तो साक्षात परमात्मा का स्वरूप है। कहा कि गुरु से भी ज्यादा महत्व रामचरितमानस में गुरु के चरणों करते विधायक व संत चिन्मयानंद बापू। की रज का है, जो कि हमारे मोक्ष के लिए पर्याप्त है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु अवश्य बनाना चाहिए। शरद शर्मा, प्रदीप पुरवार, सुरेश पुरवार, शैलेंद्र गुप्ता, दिलीप गुप्ता, रामू, महेंद्र गुप्ता, श्यामजी शर्मा, जेपी राजपूत, सत्य प्रकाश, कालू सेठ मौजूद रहे।

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